देहरादून | उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को गोरखा मिलिट्री इंटर कॉलेज, देहरादून में आयोजित राज्यव्यापी पौधारोपण कार्यक्रम में हिस्सा लिया और रुद्राक्ष का पौधा रोपा।

इस वर्ष की थीम रही – “हरेला का त्योहार मनाओ, धरती माँ का ऋण चुकाओ”।
सीएम ने प्रदेशवासियों को पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हरेला सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि यह उत्तराखंड की संस्कृति, प्रकृति और चेतना से जुड़ा एक अभियान है, जो हमें पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी का बोध कराता है।
🔹 5 लाख पौधारोपण का लक्ष्य, हर वन डिवीजन में 50% फलदार पौधे लगाए जाएंगे।
🔹 पौधों की निगरानी और संरक्षण पर भी विशेष ज़ोर दिया गया।
🔹 जनसहभागिता, एनजीओ, महिला समूह, छात्र-छात्राएं, पंचायतें भी इस अभियान का हिस्सा।

जल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम – SARRA का गठन
सीएम धामी ने बताया कि राज्य में 6,500 से अधिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित किया गया है और 3.12 मिलियन घन मीटर वर्षा जल का संचयन किया जा चुका है। साथ ही, सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध और वाहनों में कूड़ेदान अनिवार्य किया गया है।
उन्होंने पीएम मोदी के पर्यावरणीय अभियानों ‘पंचामृत संकल्प’, ‘नेट ज़ीरो इमिशन’, ‘एक पेड़ माँ के नाम’ का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तराखंड सरकार इन्हीं मूल्यों को आत्मसात कर आगे बढ़ रही है।

हरेला पर्व के बहाने जनजागरूकता और सामूहिक भागीदारी को बल
कृषि मंत्री गणेश जोशी और वन मंत्री सुबोध उनियाल ने भी प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व प्राकृतिक संतुलन और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि राज्य के 2,389 स्थानों पर हरेला पर्व मनाया गया है और बीते तीन वर्षों में रोपे गए पौधों का 80% से अधिक सर्वाइवल रेट रहा है।
📸 इस अवसर पर देहरादून के जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, छात्रों और वन विभाग के कर्मचारियों ने भी भागीदारी निभाई।